छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी किसान न्याय योजना: इतिहास, लाभ और भू-अभिलेख से संबंध
छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में राजीव गांधी किसान न्याय योजना (RGKNY) किसानों को कृषि लागत में राहत और फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं में रही है। योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी कृषि उपज के लिए बेहतर आर्थिक सहायता देना तथा कृषि में निवेश और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना था।
हालांकि, वर्तमान व्यवस्था को समझते समय योजना के ऐतिहासिक स्वरूप और वर्तमान कृषि सहायता व्यवस्था में अंतर करना जरूरी है। छत्तीसगढ़ शासन की वर्तमान जानकारी के अनुसार खरीफ 2025 से कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को आदान सहायता और फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
LandSeva के इस लेख में हम राजीव गांधी किसान न्याय योजना की पृष्ठभूमि, इसके प्रमुख उद्देश्य, भू-अभिलेखों और गिरदावरी की भूमिका तथा वर्तमान में किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि सहायता व्यवस्था को सरल भाषा में समझेंगे।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना क्या थी?
राजीव गांधी किसान न्याय योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को कृषि क्षेत्र में आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना थी।
योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी। प्रारंभिक व्यवस्था में धान, मक्का और गन्ना जैसी फसलों के किसानों को आदान सहायता देने का प्रावधान किया गया था। तत्कालीन शासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सहायता राशि का भुगतान किस्तों में किया गया था।
बाद के वर्षों में योजना के अंतर्गत फसलों और सहायता के दायरे में विस्तार किया गया तथा कृषि में विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना का मुख्य उद्देश्य
योजना के प्रमुख उद्देश्यों में निम्न बातें शामिल थीं:
- किसानों को कृषि लागत में आर्थिक राहत देना।
- कृषि में निवेश को प्रोत्साहित करना।
- किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करना।
- धान के साथ अन्य फसलों को बढ़ावा देना।
- फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।
- कृषि को अधिक लाभकारी गतिविधि के रूप में विकसित करना।
- किसानों को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाना।
सरकारी दस्तावेजों में कृषि निवेश, लागत में राहत और फसल विविधीकरण को महत्वपूर्ण उद्देश्य के रूप में बताया गया था।
क्या अभी भी राजीव गांधी किसान न्याय योजना के नाम से ₹9,000 प्रति एकड़ मिलते हैं?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के पुराने वर्षों में सहायता राशि और उसकी दरें अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार थीं। उदाहरण के लिए, सरकारी प्रकाशन में धान किसानों को ₹9,000 प्रति एकड़ तक की सहायता का उल्लेख मिलता है।
लेकिन 2026 में इसे वर्तमान भुगतान दर मानना सही नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ शासन ने खरीफ 2025 से कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत कृषि आदान सहायता की वर्तमान व्यवस्था लागू की है। इसलिए किसान को वर्तमान वर्ष में कितनी सहायता मिलेगी, यह उस वर्ष के लागू सरकारी दिशा-निर्देश, फसल, पंजीयन और मान्य रकबे पर निर्भर करेगा।
वर्तमान में कृषक उन्नति योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
खरीफ 2025 से छत्तीसगढ़ में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसलें जैसे कोदो-कुटकी-रागी और कपास जैसी फसलों को भी आदान सहायता के दायरे में रखा गया है।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र फसलों के लिए एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन और गिरदावरी में रकबे की पुष्टि महत्वपूर्ण है। खरीफ 2025 में चिन्हित दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य और कपास के लिए ₹10,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता का प्रावधान बताया गया है।
धान के मामले में सहायता की गणना अलग प्रावधानों के अनुसार की गई है और मान्य रकबे तथा धान की बिक्री आदि से संबंधित शर्तें लागू होती हैं।
इसलिए किसानों को पुराने RGKNY articles में लिखी राशि को वर्तमान भुगतान मानने के बजाय संबंधित खरीफ वर्ष के आधिकारिक दिशा-निर्देश देखना चाहिए।
भू-अभिलेख का किसान योजना से क्या संबंध है?
किसान को कृषि सहायता या प्रोत्साहन राशि देने की प्रक्रिया में भूमि का रिकॉर्ड और फसल का वास्तविक रकबा महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसी कारण किसानों के लिए निम्न भू-अभिलेखों को सही रखना महत्वपूर्ण है:
B-1 (खतौनी): भूमि खाते और खातेदार से संबंधित राजस्व विवरण देखने के लिए महत्वपूर्ण अभिलेख।
P-II (खसरा): संबंधित खसरा और भूमि से जुड़ी जानकारी का महत्वपूर्ण अभिलेख।
भू-नक्शा: भूमि की स्थिति और सीमाओं से संबंधित मानचित्र संबंधी जानकारी।
गिरदावरी: खेत में वास्तविक रूप से बोई गई फसल और संबंधित रकबे के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया।
कृषक उन्नति योजना के 2025 के सरकारी दिशा-निर्देशों में एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि को सहायता के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
गिरदावरी क्यों महत्वपूर्ण है?
मान लीजिए किसी किसान के पास 5 एकड़ कृषि भूमि है, लेकिन किसी मौसम में उसने केवल 3 एकड़ में मक्का लगाया है।
ऐसी स्थिति में केवल B-1 में दर्ज कुल भूमि देखकर सहायता की गणना नहीं की जानी चाहिए। संबंधित योजना के नियमों के अनुसार मान्य फसल रकबा और गिरदावरी का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसी कारण किसान को यह जांचना चाहिए कि:
- भूमि रिकॉर्ड में रकबा सही है।
- खसरा नंबर सही है।
- फसल की जानकारी सही दर्ज हुई है।
- किसान का एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन है।
- गिरदावरी में संबंधित फसल और रकबा सही दर्ज है।
एकीकृत किसान पोर्टल क्या है?
छत्तीसगढ़ में किसानों की विभिन्न कृषि योजनाओं और सेवाओं से संबंधित पंजीयन के लिए एकीकृत किसान पोर्टल (Unified Farmer Portal) का उपयोग किया गया है।
सरकारी जिला पोर्टल की जानकारी के अनुसार इस पोर्टल का उपयोग राजीव गांधी किसान न्याय योजना सहित विभिन्न कृषि योजनाओं के लिए किसान पंजीयन में किया जाता रहा है।
वर्तमान योजनाओं में पंजीयन और पात्रता की शर्तें संबंधित वर्ष के दिशा-निर्देश के अनुसार देखी जानी चाहिए।
किसान को अपनी भूमि संबंधी कौन-कौन सी जानकारी जांचनी चाहिए?
किसी भी कृषि सहायता योजना का लाभ लेने से पहले किसान को अपने भूमि रिकॉर्ड में निम्न जानकारी जांच लेना उपयोगी है:
- खातेदार का नाम सही है या नहीं।
- खसरा नंबर सही है या नहीं।
- भूमि का रकबा सही है या नहीं।
- भूमि का खाता सही है या नहीं।
- भूमि का रिकॉर्ड वर्तमान स्थिति के अनुसार अपडेट है या नहीं।
- गिरदावरी में फसल और रकबा सही दर्ज है या नहीं।
- किसान पंजीयन की जानकारी सही है या नहीं।
- बैंक खाते से संबंधित जानकारी सही है या नहीं।
B-1 में गलती होने पर क्या करें?
यदि B-1 में नाम, खाता, खसरा या रकबे से संबंधित कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो किसान को संबंधित राजस्व प्रक्रिया के माध्यम से सुधार करवाना चाहिए।
केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर या उसका स्क्रीनशॉट लेकर गलती ठीक नहीं होती। त्रुटि के प्रकार के अनुसार नामांतरण, अभिलेख दुरुस्ती या अन्य राजस्व प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।
भूमि रिकॉर्ड से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों में संबंधित तहसील/राजस्व कार्यालय से प्रक्रिया की पुष्टि करना उचित है।
गिरदावरी में फसल गलत दर्ज हो जाए तो क्या करें?
यदि किसान ने किसी खसरे में एक फसल बोई है लेकिन रिकॉर्ड में दूसरी फसल दिखाई दे रही है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
ऐसी स्थिति में संबंधित राजस्व/कृषि प्रक्रिया के अनुसार समय रहते शिकायत या सुधार का अनुरोध करना चाहिए। क्योंकि कुछ कृषि योजनाओं में सहायता के लिए फसल और मान्य रकबे का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या B-1 अकेले किसान योजना का लाभ दिला सकता है?
नहीं।
B-1 महत्वपूर्ण भूमि अभिलेख है, लेकिन किसी योजना का लाभ केवल B-1 के आधार पर निर्धारित नहीं होता। पात्रता में किसान पंजीयन, फसल, गिरदावरी, मान्य रकबा, बिक्री/उपार्जन और संबंधित योजना के अन्य नियम शामिल हो सकते हैं।
इसलिए किसान को केवल B-1 ही नहीं, बल्कि संबंधित योजना के सभी आवश्यक रिकॉर्ड और पंजीयन की स्थिति जांचनी चाहिए।
वर्तमान सहायता राशि कहां से जांचें?
कृषि योजनाओं की राशि और पात्रता समय के साथ बदल सकती है। इसलिए पुराने सोशल मीडिया पोस्ट या पुराने articles के बजाय संबंधित वर्ष के छत्तीसगढ़ शासन/कृषि विभाग के दिशा-निर्देश को आधार बनाना चाहिए।
2025 के सरकारी दिशा-निर्देशों में कृषक उन्नति योजना के लिए अलग-अलग फसलों और परिस्थितियों के अनुसार आदान सहायता की दरें निर्धारित की गई थीं।
निष्कर्ष
राजीव गांधी किसान न्याय योजना छत्तीसगढ़ में किसानों को कृषि लागत में राहत, कृषि निवेश और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने वाली महत्वपूर्ण योजना रही है।
वर्तमान समय में किसानों के लिए केवल योजना का नाम जानना पर्याप्त नहीं है। B-1, P-II, गिरदावरी, एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन और बैंक संबंधी जानकारी भी सही रखना महत्वपूर्ण है।
खरीफ 2025 से लागू कृषक उन्नति योजना के दिशा-निर्देशों से यह स्पष्ट है कि वर्तमान कृषि सहायता व्यवस्था में फसल, पंजीयन और गिरदावरी में दर्ज मान्य रकबा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- इसलिए किसान को हर खरीफ वर्ष में लागू नई सरकारी गाइडलाइन के अनुसार अपनी पात्रता और सहायता राशि की जानकारी जांचनी चाहिए।