छत्तीसगढ़ में जमीन का व्यपवर्तन (Land Diversion) क्या है?
यदि किसी भूमि का वर्तमान उपयोग कृषि है और उसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य, जैसे आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या अन्य अनुमत गैर-कृषि प्रयोजन के लिए किया जाना है, तो लागू राजस्व कानूनों के अनुसार भूमि के उपयोग में परिवर्तन की प्रक्रिया को व्यपवर्तन (Land Diversion) कहा जाता है।
छत्तीसगढ़ में व्यपवर्तन की कार्यवाही छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 172 तथा संबंधित नियमों के अंतर्गत होती है। व्यपवर्तन के मामलों में कानून में "सक्षम प्राधिकारी" की व्यवस्था है, इसलिए प्रत्येक मामले में केवल SDO को ही सक्षम अधिकारी मानना सही नहीं है।
सरल शब्दों में समझें तो:
कृषि उपयोग → गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तन = व्यपवर्तन
उदाहरण के लिए, यदि किसी भूमि का उपयोग कृषि के रूप में दर्ज है और उसके किसी भाग का उपयोग अनुमत प्रक्रिया के अनुसार घर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या अन्य गैर-कृषि प्रयोजन के लिए किया जाना है, तो संबंधित व्यपवर्तन नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
व्यपवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?
भूमि का उपयोग केवल मालिक की इच्छा से नहीं बदला जाता। भूमि के राजस्व अभिलेख, विकास योजना, स्थानीय निकाय के नियम और अन्य लागू कानूनों को ध्यान में रखना आवश्यक हो सकता है।
व्यपवर्तन की आवश्यकता और उसके बाद की कार्यवाही मामले के प्रकार, भूमि के स्थान, प्रस्तावित उपयोग और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्रत्येक स्थिति में एक ही प्रकार का "डायवर्शन प्रमाण पत्र" सभी विभागों के लिए अनिवार्य है। भवन निर्माण, कॉलोनी, प्लॉटिंग, व्यापारिक गतिविधि या उद्योग के लिए स्थानीय निकाय, नगर एवं ग्राम निवेश तथा अन्य संबंधित विभागों की अलग-अलग अनुमति भी आवश्यक हो सकती है।
किन प्रयोजनों के लिए व्यपवर्तन हो सकता है?
भूमि का उपयोग नियमों के अधीन विभिन्न प्रयोजनों के लिए परिवर्तित किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर:
- आवासीय उपयोग
- व्यावसायिक उपयोग
- औद्योगिक उपयोग
- संस्थागत उपयोग
- अन्य अनुमत गैर-कृषि प्रयोजन
किसी विशेष भूमि पर कौन-सा उपयोग अनुमत है, यह केवल भूमि मालिक की इच्छा से तय नहीं होता। संबंधित विकास योजना, स्थानीय नियम और अन्य वैधानिक प्रतिबंध भी देखे जा सकते हैं।
व्यपवर्तन के लिए सामान्यतः कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
ऑनलाइन आवेदन करते समय संबंधित प्रकरण के अनुसार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होते हैं। छत्तीसगढ़ राजस्व न्यायालय की वर्तमान ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था में व्यपवर्तन आवेदन के साथ खसरा, B-1, नक्शा तथा Town & Country Planning (T&CP) से संबंधित NOC संलग्न करने का निर्देश प्रदर्शित है।
सामान्यतः आवेदक को निम्न दस्तावेज तैयार रखने चाहिए:
- अद्यतन B-1 / खतौनी
- संबंधित खसरा विवरण
- भूमि का नक्शा
- प्रस्तावित उपयोग से संबंधित दस्तावेज
- आवश्यक होने पर Town & Country Planning की NOC
- आवेदक की पहचान संबंधी जानकारी
- अन्य दस्तावेज, जो संबंधित प्रकरण में सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवश्यक किए जाएं
ध्यान रखें कि सभी मामलों में दस्तावेजों की सूची बिल्कुल समान हो, यह आवश्यक नहीं है। आवेदन करने से पहले संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर वर्तमान दस्तावेज आवश्यकताओं की जांच करना उचित है।
छत्तीसगढ़ में जमीन का व्यपवर्तन कैसे करें?
चरण 1: नागरिक पंजीयन और ऑनलाइन आवेदन
छत्तीसगढ़ राजस्व न्यायालय की ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से नागरिक पंजीयन करके संबंधित राजस्व आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
आवेदन में आवेदक की जानकारी, भूमि का विवरण, खसरा आदि की जानकारी सही-सही भरना आवश्यक है। उपलब्ध आवश्यक दस्तावेजों को PDF के रूप में अपलोड करने की व्यवस्था भी है।
चरण 2: भूमि और प्रस्तावित उपयोग की जानकारी देना
आवेदन में संबंधित जिला, तहसील, ग्राम, खसरा नंबर, क्षेत्रफल तथा प्रस्तावित भूमि उपयोग की जानकारी दर्ज की जाती है।
यदि केवल भूमि के किसी भाग का व्यपवर्तन प्रस्तावित है, तो उस भाग का क्षेत्रफल और विवरण स्पष्ट होना चाहिए।
चरण 3: आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना
आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। वर्तमान राजस्व न्यायालय आवेदन व्यवस्था में व्यपवर्तन के लिए B-1, नक्शा और T&CP द्वारा जारी NOC से संबंधित निर्देश प्रदर्शित हैं।
चरण 4: प्रकरण का पंजीयन
आवेदन स्वीकार होने के बाद संबंधित राजस्व न्यायालय/प्राधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण पंजीकृत किया जाता है।
राजस्व न्यायालय की ऑनलाइन व्यवस्था में प्रकरण के पंजीयन से लेकर अंतिम निराकरण तक विभिन्न कार्यवाहियों को ऑनलाइन दर्ज या अपलोड करने की व्यवस्था है।
चरण 5: जांच और आवश्यक प्रतिवेदन
प्रकरण के अनुसार संबंधित राजस्व अधिकारियों/कर्मचारियों से आवश्यक प्रतिवेदन या जांच कराई जा सकती है।
भूमि की स्थिति, रिकॉर्ड, प्रस्तावित उपयोग तथा अन्य वैधानिक पहलुओं की जांच संबंधित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
यह कहना सही नहीं है कि हर व्यपवर्तन मामले में एक ही प्रकार की पटवारी जांच या पंचनामा अनिवार्य रूप से उसी क्रम में होगा। कार्यवाही प्रकरण की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार हो सकती है।
चरण 6: T&CP अथवा अन्य विभागों से अभिमत
वर्तमान राजस्व पोर्टल में risk classification के अनुसार 5,000 वर्गफुट तक के व्यपवर्तन को low-risk तथा 5,000 वर्गफुट से अधिक को high-risk के रूप में प्रदर्शित किया गया है। उच्च जोखिम वाले मामलों को Town & Country Planning विभाग से अभिमत के लिए प्रस्तुत किए जाने की व्यवस्था पोर्टल पर दी गई है।
इसलिए बड़े क्षेत्रफल के मामलों में अतिरिक्त विभागीय जांच/अभिमत की आवश्यकता हो सकती है।
चरण 7: प्रीमियम, भू-भाटक और अन्य देयताओं का निर्धारण
व्यपवर्तन के बाद भूमि के परिवर्तित उपयोग के अनुसार लागू नियमों के तहत भूमि राजस्व/भू-भाटक तथा अन्य देय राशि निर्धारित हो सकती है।
राशि भूमि के स्थान, उपयोग, क्षेत्रफल और उस समय लागू शासन के नियम/दर-सारणी पर निर्भर कर सकती है।
इसलिए किसी ब्लॉग में बिना वर्तमान दर-सारणी देखे कोई एक निश्चित प्रतिशत या राशि लिखना उचित नहीं है।
चरण 8: आदेश पारित होना
आवश्यक जांच, प्रतिवेदन, अभिमत और अन्य वैधानिक कार्यवाही पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण में आदेश पारित किया जाता है।
राजस्व न्यायालय की डिजिटल व्यवस्था में आदेश पत्र और अंतिम निराकरण की कार्यवाही को ऑनलाइन दर्ज/अपलोड करने की व्यवस्था है।
चरण 9: भूमि अभिलेख में आवश्यक संधारण
व्यपवर्तन/भूमि पुनर्निर्धारण की कार्यवाही पूर्ण होने के बाद संबंधित भूमि की जानकारी राजस्व अभिलेख और डायवर्सन रिकॉर्ड में संधारित की जाती है।
छत्तीसगढ़ के आधिकारिक डायवर्सन पोर्टल पर नागरिकों के लिए परिवर्तित भूमि से संबंधित भू-खण्ड की जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है।
व्यपवर्तन में कितना समय लगता है?
समय-सीमा प्रकरण की प्रकृति और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के वर्तमान नागरिक आवेदन डैशबोर्ड में 9 फरवरी 2026 के बाद भूमि पुनर्निर्धारण हेतु पंजीकृत व्यपवर्तन प्रकरणों की समय-सीमा 15 दिन प्रदर्शित है।
इसी डैशबोर्ड में 9 फरवरी 2026 से पहले पंजीकृत पुराने व्यपवर्तन मामलों के लिए 90 दिन की अलग श्रेणी भी प्रदर्शित है।
इसलिए पुराने और नए प्रकरणों की समय-सीमा को एक समान नहीं माना जाना चाहिए।
क्या व्यपवर्तन के लिए सरकारी आवेदन शुल्क लगता है?
राजस्व न्यायालय में प्रकरण का ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने के संबंध में वर्तमान पोर्टल पर यह उल्लेख है कि राजस्व प्रकरणों के आवेदन के लिए विभाग द्वारा कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यपवर्तन से संबंधित सभी वित्तीय देयताएं शून्य हैं।
भूमि उपयोग परिवर्तन के बाद लागू नियमों के अनुसार प्रीमियम, भू-भाटक अथवा अन्य वैधानिक देयताएं निर्धारित हो सकती हैं। इसलिए आवेदन शुल्क और व्यपवर्तन से संबंधित राजस्व देयताओं को अलग-अलग समझना चाहिए।
क्या ऑनलाइन व्यपवर्तन आवेदन की स्थिति देख सकते हैं?
हाँ। छत्तीसगढ़ राजस्व न्यायालय की ऑनलाइन व्यवस्था में आवेदन/प्रकरण की स्थिति देखने की सुविधा उपलब्ध है।
आवेदक को आवेदन के दौरान प्राप्त कंप्यूटर जनरेटेड नंबर/प्रकरण विवरण को सुरक्षित रखना चाहिए।
क्या व्यपवर्तन के बाद भी अन्य अनुमति की आवश्यकता हो सकती है?
हाँ।
व्यपवर्तन केवल भूमि के राजस्व उपयोग से संबंधित प्रक्रिया है। इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण, प्लॉटिंग, कॉलोनी, उद्योग या व्यवसाय शुरू करने की सभी अन्य अनुमतियां प्राप्त हो गई हैं।
परिस्थिति के अनुसार निम्न में से संबंधित अनुमति की आवश्यकता हो सकती है:
- ग्राम पंचायत/नगर पंचायत/नगर पालिका/नगर निगम की अनुमति
- Town & Country Planning से संबंधित अनुमति
- भवन अनुज्ञा
- ले-आउट/प्लॉटिंग संबंधी अनुमति
- पर्यावरण संबंधी अनुमति
- उद्योग या व्यवसाय से संबंधित विभागीय अनुमति
इसलिए भूमि का व्यपवर्तन और भवन निर्माण/व्यवसाय की अनुमति को एक ही प्रक्रिया नहीं समझना चाहिए।
व्यपवर्तन की जानकारी ऑनलाइन कहाँ देखें?
छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के आधिकारिक डायवर्सन पोर्टल पर परिवर्तित भूमि की जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है।
नागरिक जिला, तहसील, ग्राम, ब्लॉक/शीट तथा भू-खण्ड क्रमांक के आधार पर उपलब्ध डायवर्सन जानकारी खोज सकते हैं।
व्यपवर्तन से जुड़ी आम गलतियां
भूमि मालिकों को निम्न गलतियों से बचना चाहिए:
- पुराने B-1 या पुराने खसरा विवरण के आधार पर आवेदन करना।
- गलत खसरा नंबर या क्षेत्रफल दर्ज करना।
- जिस भूमि का केवल कुछ भाग परिवर्तित करना है, उसका स्पष्ट विवरण न देना।
- आवश्यक नक्शा या NOC संलग्न न करना।
- व्यपवर्तन को भवन निर्माण की अंतिम अनुमति समझ लेना।
- केवल मौखिक जानकारी के आधार पर शुल्क जमा करना।
- आवेदन क्रमांक/प्रकरण क्रमांक सुरक्षित न रखना।
- आदेश होने के बाद राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि की स्थिति की जांच न करना।
महत्वपूर्ण कानूनी सावधानी
भूमि संबंधी कानूनों और प्रक्रियाओं में समय-समय पर संशोधन हो सकते हैं। इसलिए व्यपवर्तन के लिए शुल्क, सक्षम प्राधिकारी, दस्तावेज, समय-सीमा और अन्य शर्तों की जानकारी आवेदन के समय उपलब्ध आधिकारिक सरकारी पोर्टल/नियमों से सत्यापित करना चाहिए।
LandSeva का यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी विशेष भूमि के मामले में अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व अभिलेख, लागू कानून, सक्षम प्राधिकारी के आदेश तथा अन्य संबंधित विभागों की अनुमति के आधार पर होगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में भूमि के कृषि से अन्य अनुमत उपयोग में परिवर्तन के लिए व्यपवर्तन एक महत्वपूर्ण राजस्व प्रक्रिया है। वर्तमान व्यवस्था में नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और राजस्व न्यायालय प्रणाली के माध्यम से प्रकरण की कार्यवाही तथा स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
व्यपवर्तन कराने से पहले भूमि का रिकॉर्ड, क्षेत्रफल, प्रस्तावित उपयोग, आवश्यक NOC और अन्य दस्तावेजों की जांच करना चाहिए। साथ ही यह समझना जरूरी है कि व्यपवर्तन और भवन निर्माण या अन्य विभागीय अनुमति अलग-अलग प्रक्रियाएं हो सकती हैं।
भूमि संबंधी किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले वर्तमान सरकारी नियम और संबंधित सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया अवश्य जांचें।